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योग के सà¤à¥€ सूतà¥à¤° सà¥à¤¦à¥ƒà¤¢à¤¼ मानव जीवन की आधारशिला हैं
योग पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल से à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• संचेतना का केंदà¥à¤° रहा है। इसके आदिम सूतà¥à¤°à¤§à¤¾à¤° परमयोगी à¤à¤—वान शिव हैं। योग शबà¥à¤¦ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अरà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में होता रहा है। समाधि अरà¥à¤¥ में इसका पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— आतà¥à¤®à¤¾ और परमातà¥à¤®à¤¾ के मिलन के लिठकिया जाता है, जब साधक अपनी साधना की चरमावसà¥à¤¥à¤¾ में परमातà¥à¤®à¤¾ से à¤à¤•ाकार होकर उसका साकà¥à¤·à¤¾à¤¤à¥à¤•ार कर लेता है। अगà¥à¤¨à¤¿à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤£ में à¤à¥€ मन à¤à¤µà¤‚ आतà¥à¤®à¤¾ तथा आतà¥à¤®à¤¾ और परमातà¥à¤®à¤¾ के संयोग को योग कहा गया।
सांखà¥à¤¯à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पà¥à¤°à¤•ृति और पà¥à¤°à¥à¤· का à¤à¥‡à¤¦ होने पर à¤à¥€ पà¥à¤°à¥à¤· का आतà¥à¤®à¤¸à¥à¤µà¤°à¥‚प में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हो जाना योग कहलाता है। कठोपनिषदॠके अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, जब इंदà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ मन के साथ और मन अविचल बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ के साथ सà¥à¤¥à¤¿à¤° हो जाता है तो यह अवसà¥à¤¥à¤¾ योग की होती है। गीता में à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ ने ‘योग: करà¥à¤®à¤¸à¥ कौशलमà¥â€™ कहकर योग का जो सà¥à¤µà¤°à¥‚प अजरà¥à¤¨ के समकà¥à¤· पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया है वह सामानà¥à¤¯ जन के सरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤• निकट है। कोई à¤à¥€ मनà¥à¤·à¥à¤¯ à¤à¤•ागà¥à¤°à¤šà¤¿à¤¤à¥à¤¤ होकर निषà¥à¤•ाम à¤à¤¾à¤µ से करà¥à¤® करते हà¥à¤ योग को सिदà¥à¤§ कर सकता है।
योगसूतà¥à¤° के पà¥à¤°à¤£à¥‹à¤¤à¤¾ महरà¥à¤·à¤¿ पतंजलि संयमन अरà¥à¤¥ में चितà¥à¤¤à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के निरोध को योग कहते हैं। उनके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° यम, नियम, आसन, धà¥à¤¯à¤¾à¤¨, धारणा आदि आठअंगों से संपनà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® की विविध कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤‚ योग कहलाती हैं। इससे चितà¥à¤¤ की à¤à¤•ागà¥à¤°à¤¤à¤¾ बढ़ती है। बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ में सà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ आती है। चिंतन उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ होता है। मन में सदà¥à¤µà¤¿à¤šà¤¾à¤°à¥‹à¤‚ का उदय होता है। नकारातà¥à¤®à¤• पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ सà¥à¤µà¤¤: समापà¥à¤¤ हो जाती हैं। परिणामत: आतà¥à¤®à¤¿à¤• और शारीरिक शकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में वृदà¥à¤§à¤¿ होती है। इससे अपूरà¥à¤µ शांति का अनà¥à¤à¤µ होता है। फिर वह सतà¥à¤¸à¤‚कलà¥à¤ª के साथ सतà¥à¤ªà¤¥ पर बढ़ता हà¥à¤† मानव जीवन के वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर लेता है।
वासà¥à¤¤à¤µ में योग के सà¤à¥€ सूतà¥à¤° सà¥à¤¦à¥ƒà¤¢à¤¼ मानव जीवन की आधारशिला हैं। इसीलिठइसे समसà¥à¤¤ संसार ने आतà¥à¤®à¤¸à¤¾à¤¤ किया है। अत: दीरà¥à¤˜ जीवन की संजीवनी शकà¥à¤¤à¤¿ के लिठपà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ को योग करना चाहिà¤à¥¤ योग ही जीवन को पूरà¥à¤£à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है।
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